STORYMIRROR

P Anurag Puri

Romance

4  

P Anurag Puri

Romance

!! पहली मोहब्बत !!

!! पहली मोहब्बत !!

1 min
446

कुछ खास नहीं बस इतनी सी

मोहब्बत है मेरी

हर रात की आखरी ख्याल और

सुबह की पहली सोच बो थी

किसीका प्यार पा लेना ही

मोहब्बत नहीं होती

कभी उस प्यार में डूब के देखो

पता चले आखिर ये प्यार की भाषा क्या होती...


कैसे भूल जाऊँ उसे में

आखिर...

वो मेरी पहली मोहब्बत जो थी।।


वो छोड़ गए हमें

न जाने उनकी क्या मजबूरी थी

खुदा ने कहा!!

इनमे उनकी कोई कसूर नहीं

ये कहानी तो

मेने लिखी ही अधूरी थी 


अब तू ही बता दे खुदा

कैसे मिटा दूं उसे इस दिल से में...

आखिर...

वो मेरी पहली मोहब्बत जो थी।।


आगे सफर था... 

पीछे हमसफ़र थी

रुकते तो ज़िन्दगी छूट ती

और चलते तो तुम छूट जाती

आज कुछ बात थी जो

शाम पे रोना आया

बरना हर शाम तो

उमीदो पे गुजरती थी

लाख भुलाया उसे में

फिर भी याद उसकी आती थी

में पानी पी पी के थक जाता

फिर हिचकिया बनके सताती थी...


किस गुस्ताखी से दूर होता उससे

आखिर...

वो मेरी पहली मोहब्बत जो थी।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance