STORYMIRROR

Ram Chandar Azad

Classics

3  

Ram Chandar Azad

Classics

वो

वो

1 min
379

अपना गम यूं वो किसी से भी छुपाया करते

जब कभी मिलते तो हौले से मुस्कराया करते।


उनकी बातों में तजुर्बों का झलकता मंज़र

जो कि हर दिल पे सलीके से छा जाया करते।


अपनी जज़्बात खयालात के इतने पक्के

मुफलिसी में भी कदम वो न हटाया करते।


वो रहम दिल प्यार का जिसमें समंदर बसता

बेजुबानों की जुबां बनके हिफाज़त करते।


आइना झूठ बोल सकता हो शायद मुमकिन

उनकी फितरत है वो झूठ को ठुकराया करते।


उनको "आज़ाद" इधर की उधर नहीं आती

दिल में जो बात आ जाती वो सुनाया करते।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics