वो मस्ती भरे दिन
वो मस्ती भरे दिन
वो मस्ती भरे दिन
वो पीपल की छाँव
वो सखियों का साथ
लाल परी, नीली परी
पोशम्पा -भई पोशम्पा
बोल मेरी मछली कितना पानी
वो नन्हा सा राजकुमार
वो परियों की कहानी
वो बचपन,
आज बहुत याद आया
आज तो कैसा सूनापन है
खाली चौपाल, खाली आँगन है
वो नन्ही चिड़िया भी
आज नहीं आयी
वो नानी का घर,
वो दादी का प्यार
फिर से पाने को
आँखें छलक आयी
एक -दूजे के लिए
आज वक़्त नहीं है
पर नेटफ्रैंड की
कमी नहीं है
इस तकनीकी दुनिया ने
सब कुछ छीन लिया
नन्हे-मुन्हों से
उनका भोला बचपन
और बड़ों से
उनका सुख-चैन
दुनिया को तो जोड़ा पर
अपनी ही जड़ों से तोड़ दिया।।
