वो कब मिला
वो कब मिला
बन्दों से क्या गिला
ख़ुदा से क्या मिला
ग़म-ए-दहर मिला
बिखरा आसमां मिला
और उस परी रु का
ख्यालों से ख्याल मिला
फिर आगे क्या हुआ
अश्कों में बहता वो मिला
सिमटा आशियाँ मिला
अज़ाब-ए-जहाँ मिला
और जब देखा उसे कराहता
'प्रेम' लहू में तर-बतर मिला।
