Premnath Yadav
Tragedy
बन्दों से क्या गिला
ख़ुदा से क्या मिला
ग़म-ए-दहर मिला
बिखरा आसमां मिला
और उस परी रु का
ख्यालों से ख्याल मिला
फिर आगे क्या हुआ
अश्कों में बहता वो मिला
सिमटा आशियाँ मिला
अज़ाब-ए-जहाँ मिला
और जब देखा उसे कराहता
'प्रेम' लहू में तर-बतर मिला।
वो कब मिला
फिर भी हम तुझ...
ज़िक्र होगा।
उसका ज़िक्र ह...
मैं प्रेम हूं...
तुम्हारी नस्ल...
अब ये न करेंग...
बढ़ रहा मानव का अत्याचार दुनिया में सतत पनप रहे रोग बढ़ रहा मानव का अत्याचार दुनिया में सतत पनप रहे रोग
तब मुंह नहीं खोल पाते। बड़ी बेहयाई से खीस निपोरते। तब मुंह नहीं खोल पाते। बड़ी बेहयाई से खीस निपोरते।
वो सूरत आँखों से हटती नहीं है उसकी हर बात दिल में अखरती नहीं है। वो सूरत आँखों से हटती नहीं है उसकी हर बात दिल में अखरती नहीं है।
कितनी कोशिश करूँ मुस्कराने की छलक ही उठता है दर्द। कितनी कोशिश करूँ मुस्कराने की छलक ही उठता है दर्द।
स्त्री प्राकृतिक है प्रकृति स्त्रैण है। स्त्री प्राकृतिक है प्रकृति स्त्रैण है।
मैं उनके लिए रो रहा हूं जो मेरे रिश्तेदार नहीं हैं, मैं उनके लिए रो रहा हूं जो मेरे रिश्तेदार नहीं हैं,
लौटा खुशी खुशी अपने घर तो देखा अंधेरों की कमी न थी. लौटा खुशी खुशी अपने घर तो देखा अंधेरों की कमी न थी.
काश वो वक्त फिर से आए हँसते खेलते घर को बनाए काश वो वक्त फिर से आए हँसते खेलते घर को बनाए
मेरे चेहरे पर जो भी उदासी की लकीरें देखते हो। मेरे चेहरे पर जो भी उदासी की लकीरें देखते हो।
किसान दबा कुचला समाज समय का अभिशाप।। किसान दबा कुचला समाज समय का अभिशाप।।
अब तो लफ्ज़ भी मेरे खामोश ही रहा करते हैं अब तो लफ्ज़ भी मेरे खामोश ही रहा करते हैं
क्या उसमें आपके परिवार का तो कोई कभी तो था नहीं। क्या उसमें आपके परिवार का तो कोई कभी तो था नहीं।
सिर्फ झुनझुना बजाते ही रह जायेंगे, कोई न होगा पास अकेले रह जायेंगे। सिर्फ झुनझुना बजाते ही रह जायेंगे, कोई न होगा पास अकेले रह जायेंगे।
बन भी जाएं बंधन कोई यहां, बेशक मिलेगा तिरस्कार। बन भी जाएं बंधन कोई यहां, बेशक मिलेगा तिरस्कार।
जिस पे मुसाफ़िर थक हार के लौट सकता है जिस पे मुसाफ़िर थक हार के लौट सकता है
मेरी प्यारी मां, हो तुम कहां, मुझे छोड़ यहां। मेरी प्यारी मां, हो तुम कहां, मुझे छोड़ यहां।
काया पर इतना जुल्म मत करो मत भूलो काया नहीं तो छाया नहीं. काया पर इतना जुल्म मत करो मत भूलो काया नहीं तो छाया नहीं.
तराशा था प्यार को प्यार से मगर प्यार से वो प्यार मिला कहाँ।। तराशा था प्यार को प्यार से मगर प्यार से वो प्यार मिला कहाँ।।
बोझ से दुहरा हुआ, बदन लड़खड़ा कर गिर पड़ा। बोझ से दुहरा हुआ, बदन लड़खड़ा कर गिर पड़ा।
प्यार की महफ़िल सजाऊँगा "मुरली", तेरी इबादत करुंगा मैं। प्यार की महफ़िल सजाऊँगा "मुरली", तेरी इबादत करुंगा मैं।