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Nitu Arya

Abstract Romance Tragedy

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Nitu Arya

Abstract Romance Tragedy

वो कौन है ?

वो कौन है ?

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किसने इन रातों से नींदे चुरा ली,

किसने इन आंखों का चुरा लिया सुकून

 किसने सीने से धड़कन चुरा ली,

किसको बिना देखे लगे सारा जग सून ।


मैंने कभी नहीं चाहा कि मेरा रोम रोम

खुशी से तेरी एक नजर से खिल उठे,

तुझे देखते ही दिल की धड़कनों की आहट नगाड़ों से लगने लगे

हर साज हर सिंगार मेरे रूप का निखार


तेरी एक नजर से हो पूरी और जैसे लगे हैं

नरम नरम हरे घास पर पड़ी हो बारिश की फुहार

सोचती हूं कि कैसे रोकू इस मन को जो मेरा ना रहा

 तेरे साथ अरमानों के पंख लगा उड़ा जा रहा


 समझ ले मेरी हर धड़कन की बेकरारी ऐ मेरे बेदर्द हमसफर

कहीं ऐसा ना हो तेरे समझने से पहले मेरी अखियां जाए मून

जाने क्यों हर पल लगे.... तुझे बिना देखे लगे सारा जग सून।


 चल मेरे साथी एक सौदा करें

ले ले तूमेरे हिस्से की खुशियां,

तेरे दिए गम से मैं गुजारा कर लूंगी

जिस घड़ी तेरे पास से कोई कांटे की नोक तक गुजरे

अपने जिस्म को बीच में दीवार बना दूंगी 


 छलनी कर दे लहूलुहान कर दे पर तेरे बदन पर

तकलीफों की एक भी खराच आने ना दूंगी

 तेरी खुशियों पर अपना प्यार न्योछवर कर

कहीं दूर चली जाऊंगी

कभी न जीवन में नजर आऊं तुझे

ऐसी तेरी नजरों से ओझल हो जाऊंगी


 तेरी बढ़ती बेवफाई ने,रुसवाई ने कर दिया

मेरी वफा, मेरे प्यार,भरोसे का खून 

पता नहीं क्यों फिर भी लगे .....तुझे बिना देखे सारा जग सूना।


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