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Nitu Arya

Abstract

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Nitu Arya

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वफ़ा

वफ़ा

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देखा हजार दफा, उस गली को

जहां से गुजरा है अक्स तेरा, 

न पूछो मुड़कर हमारी इकबत

है तुम्हारी कुर्बत का सख्त पहरा

देखा हजार.......

खुमार तेरी वफ़ा का , ऐसा

के उकूबत में भी सुकून आयें

कयामत तक है तुम्हारे कायल

अब्सार तेरा है मुझ पे ठहरा 

देखा हजार ,,,,


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