STORYMIRROR

V. Aaradhyaa

Romance Classics Fantasy

4  

V. Aaradhyaa

Romance Classics Fantasy

वो हुनरदार बहुत है

वो हुनरदार बहुत है

1 min
377


आँखों में अभी शोख के इनकार बहुत है

मेरी ही तरह वो भी तो ख़ुद्दार बहुत है


खाई है सदा हार तो मैंने भी उसी से 

वो बात पलटने में हुनरदार बहुत है 


हर बार मनाता हूँ मैं यूँ रूठे सनम को

दिल उसकी अदाओं का परिस्तार बहुत है


करता ही नहीं उसकी जफ़ाओं की शिकायत

यह दिल तो उसी का ही तरफ़दार बहुत है


इस दिल के समुंदर को तू लूटेगा भी कितना

इसमें तो भरा तेरे लिए प्यार बहुत है


मैं उसको भुलाने का जतन कैसे करूँगा 

वो शख़्स मेरे दिल पे असरदार बहुत है


अब तेज़ बढ़ाने हैं क़दम आप को *साग़र*

इस दौर के इंसान की रफ़्तार बहुत है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance