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Sudershan kumar sharma

Inspirational

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Sudershan kumar sharma

Inspirational

वक्त (गजल)

वक्त (गजल)

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वक्त वक्त की बात है, 

वक्त ही बादशाह, वक्त ही मोहताज है। 


वक्त बुरा जब आता है, 

कौन है गैर, कौन है अपना सब दिखला जाता हैै। 


 वक्त अच्छा तो सब अच्छे, बुरे वक्त में कोई नहीं साथ निभाता है। 


कौन सुनता है बुरे वक्त पे

दिल की बात सुदर्शन, अपना हो या पराया हरेक

बनता अन्न दाता है। 


 आईना ही सच्चा दिखा दुनिया में, सब का सच

बतलाता है। 


मुश्किलों से क्यों डरेगा 

वो सज्जन, हर पल जो मुस्कराता है। 


 वक्त तो उसी का अच्छा सुदर्शन जो मौके का डंका बजाता है।


 हार ही जाता है आखिर आलसी,

निकम्मा, जो एक भी पल गवाता है। 


वक्त गुजरा वापिस नहीं मिलता, राजा , 

रंक हो या बुद्धि का भी दाता है। 


वक्त है फूलों की शैया, 

वक्त काटों की छाया है, 

जिसने खोया एक भी पल इसका आखिर पछताया है। 

वक्त अपना तो सब अपने हैं, वक्त पराया तो सब पराया है,

फिर क्यों समझे अपना सभी को, अगर वक्त को समझ नहीं पाया है। 


वक्त के साथ उठना, बैठना, वक्त का अन्न जिसने खाया है, झेल लेता है हर मुश्किल को

चाहे वक्त बुरा उस पर आया है। 


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