STORYMIRROR

Dr. Natasha Kushwaha

Action Crime Thriller

3  

Dr. Natasha Kushwaha

Action Crime Thriller

विषय आत्महत्या

विषय आत्महत्या

1 min
17

 अब वो दिन दूर नहीं जब
 मैं मृत्यु शैय्या पर सो जाऊं।।

विस्मय पूर्ण इस जग से तब
ओझल सी होकर खो जाऊं।।

 अब वो दिन दूर नहीं जब
 मैं मृत्यु शैय्या पर सो जाऊं।।

अहंकार ना कर प्राणी इस तन
का यौवन से भी कुंठा स्थिति पाऊं।।

अब वो दिन दूर नहीं जब
 मैं मृत्यु शैय्या पर सो जाऊं।।

देह त्याग कर दूं हंसते हंसते जाना
पति वियोग में आत्महत्या कर जाऊं।।

 अब वो दिन दूर नहीं जब
 मैं मृत्यु शैय्या पर सो जाऊं।।

पिया बिन कैसा शयन शैय्या पर
 मुक्ति पाने भटकूं देवतन के घर।।

 अब वो दिन दूर नहीं जब
 मैं मृत्यु शैय्या पर सो जाऊं।।

पति से प्रीत धरे वो प्रियतमा कैसी
 प्रतिपल ये जीवनी आत्महत्या जैसी।।

 डॉ नताशा कुशवाहा
 जिला मंडला मध्य प्रदेश


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Action