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मिली साहा

Abstract

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मिली साहा

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विश्वास

विश्वास

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इस दुनिया में ज़रूरत से ज़्यादा किसी पर विश्वास न करना

क्योंकि जब टूटता विश्वास मुश्किल होता खुद को संभालना

विश्वास बड़ा अनमोल, खुद पे हो तो बनती है ताकत हमारी

क्योंकि विश्वास ही तो जीवन में आगे बढ़ने की देता प्रेरणा


विश्वास है तो रिश्ते हैं, और रिश्तों से ही जीवन में खुशियाँ

विश्वास प्रेम का आधार विश्वास पर ही तो कायम है दुनिया

मुश्किलों का साथी है ये, है हर दुख में ये सुख की इक बूंद

विश्वास से ईश्वर मिले विश्वास से ही मिले खुशियों का जहाँ


विश्वास ही तो इस दुनिया में जो पराए भी बन जाते अपने

विश्वास कामयाबी की सीढ़ियाँ, विश्वास से ही पूरे होते सपने 

विश्वास एक दर्पण, जानबूझकर कभी किसी का ना तोड़ना

कोशिश से जुड़ भी जाए तो पहले जैसा अक्स न देता रहने


उम्र बीत जाती, किसी के मन में, दिल में विश्वास जगाने में

इंसान स्वार्थ की खातिर, एक पल ना लगाता, इसे खोने में

झूठ और दिखावा विश्वास के धागे को सदैव करे कमज़ोर

फिर भी दुनिया आगे विश्वास पर स्वार्थ की कैंची चलाने में।


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