STORYMIRROR

Kamal Chandra

Tragedy

4  

Kamal Chandra

Tragedy

विरह वेदना

विरह वेदना

1 min
243

घनर- घनर घिर आये बदरा,

याद पिया की लाये बदरा।

दादुर, मोर,पपीहा बोलें,

विरह अगन बढ़ाये बदरा।


घुमड़- घुमड़ कि बदरा आते,

पिया याद में जियरा जलाते।

जा बैठे अब परदेस पिया जी,

तिल तिल को ताप और बढ़ाते।


दिन- दिन भर मैं राह निहारूं,

क्या सौतन ने भरमा लिए हैं?

छोड़ गए क्योँ मुझे अकेली?

ब्याह किये और भूल गए हैं।


बैरी बदरा परदेस पिया की,

खोज खबर जा के ले आओ।

मेघदूत बनकर तुम जाना,

अपनी जान पिया सुध लाना।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy