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Kamal Chandra

Others

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Kamal Chandra

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बेटी की विदाई

बेटी की विदाई

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सपनों सी सजती नयनों में।

रूह सी बसती है तन-मन में।।

छाया अपने बचपन की ।

जिसमें  ढूंढी है हमने।।


अब चली घर सूना करके।

दिल में दर्द, आँखों में सपने भर के।।

मन भर लाती है बेटी की विदाई।

फिर क्यों दिल के इतने करीब आई?


यही सोचकर धैर्य रखते हैं।

रोशन करेगी घर- आंगन ।।

और सुवासित घर अपना।

हम भी छोड़े थे ममता का दामन।।


माँ के आंखों से आँसू।

पिता के चेहरे की खामोशी।।

नहीं भूल पाए हैं अब भी।

उसी दोराहे पर खड़े हैं हम भी।।


मिलना- बिछड़ना प्रकृति का नियम।

उसी में सम्मिलित हैं हम भी।।

यही तसल्ली देकर दिल को।

विदा कर रहे हैं अपने दिल को।।

     


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