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Kamal Chandra

Others

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Kamal Chandra

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"शिव स्तुति "

"शिव स्तुति "

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शिव शंकर कैलाशपति 

 तेरी महिमा अद्भुत न्यारी है 

तीनों लोक में बसने वाले 

मृत्यु भी तुझसे हारी है

शिवशंकर कैलाशपति........

गौरी सुत का मस्तक काटें

फिर अंतस में क्रोध भरे

शीश जोड़ नन्हें गजराज का

फिर गौरीसुत में प्राण भरे

शिवशंकर कैलाशपति........

मस्तक पर चंद्र रहा सुशोभित

गंगा का वेग संभाल लिया

कर संहार दुष्टों का भगवन

धरणी पाप से मुक्त किये

शिवशंकर कैलाशपति.........

जन्म, जन्मान्तर साथ निभायें 

उमा, पार्वती सँग सती 

क्रोध में आकर तांडव करते

धरणी थर थर काँप उठी

शिवशंकर कैलाशपति........

  


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