Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Ghanshyam Sharma

Abstract Inspirational


4.5  

Ghanshyam Sharma

Abstract Inspirational


विजय का नया पंथ ले

विजय का नया पंथ ले

1 min 264 1 min 264

न हार है, न जीत है,

न बैर है, न प्रीत है।


निपट एकांत चल रहा,

सखा न कोई मीत है।


मनुष्य मान ले यदि,

कि हारना मुझे नहीं।


जो बढ़ चुके मेरे कदम,

रुकेंगे अब कभी नहीं।


फ़िर कौन है जो रोक ले,

हे धीर तेरी राह को।


विजय प्रतीक्षा कर रही,

पसार अपनी बाँह को।


हताशा-हार छोड़ दे,

निराशा-नाता तोड़ दे।


विजेता बन, उभर मनुज,

दु:स्वप्न सारे तोड़ दे।


विश्वास की कलम ले थाम,

दृढ़ता का ग्रंथ ले।


छोड़ राह हार की,

विजय का नया पंथ ले।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Ghanshyam Sharma

Similar hindi poem from Abstract