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Ashu Kapoor

Romance Tragedy

4  

Ashu Kapoor

Romance Tragedy

विचलित मन की भूली हुई याद

विचलित मन की भूली हुई याद

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 मन वीणा के तारों में

जब गम झंकृत होने लगता है----

 नम आंखों से

 अश्रुओं का जब

 लय विकंपित होता है

 दिल के सागर में--- जब जब

 यादों की लहरें उठती हैं

 जो छोड़ गये थे----

 हाथ मेरा,

 जो छोड़ गये थे

  साथ मेरा

  जब- तब उनकी यादों का

  तूफान सिमटने लगता है---

   अनसुलझे सवालों की

    कारा में                --- जब

    ये मन बंदी बनने लगता है----

    अधूरी ख्वाहिशों के

    भंवरों में---- जब जीवन फंसने लगता है

    बस उसी पल

    ये मन मेरा

    विचलित होने लगता है।


    जब जान से प्यारा--- मित्र कोई

  आंख फेरने लगता है,

   जान- बूझ कर जब कोई

   अनजान समझने लगता है

    किसे त्याग दूं,

    किसे अपना लूं

     जब भव- सागर में डूब-डूब

     ये दिल हिचकोले खाने लगता है

     बस ,उसी पल ये मन मेरा---

           

विचलित होने लगता है!!

   इन भूली --बिसरी

   यादों की कारा में

   जब दिल बंदी बन जाता है,

   बस फिर उसी पल

   ये मन मेरा

  विचलित होने लगता है

    


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