Vinita Rahurikar
Tragedy
बनाती है रोटियाँ
चूल्हे, अँगीठी, स्टोव, गैस पर
परोसती है घर भर को
गरमा-गरम खाना,
और अपनों की भूख की खातिर
उम्र की धधकती आँच में
खुद तिल-तिल सुलगकर
राख होती रहती है.....।
प्रेम
चल रही हूँ मै...
कहाँ नहीं हो ...
आईना
मुहब्बत बंजार...
बेटा...
तलहटी
वर्जनाएँ...
विश्व एकता दि...
जीवन एक खेल.....
हाँ हूं मैं 'मोहब्बत' हाँ हूं मैं 'औरत' सिर्फ़ हरायी गयी हूं ! हाँ हूं मैं 'मोहब्बत' हाँ हूं मैं 'औरत' सिर्फ़ हरायी गयी हूं !
हर रात को हमने भी पिया है पिया तेरी याद का सुनहरा वो जाम। हर रात को हमने भी पिया है पिया तेरी याद का सुनहरा वो जाम।
धागा, खुशियों का उलझ गया लगता है, सब झुलस गया। धागा, खुशियों का उलझ गया लगता है, सब झुलस गया।
आरक्षण को दफ़्न करने की ज़मीन खोदते हैं। आरक्षण को दफ़्न करने की ज़मीन खोदते हैं।
मैं न तेरा अभिमान बना आज फ़िर असफल रहा। मैं न तेरा अभिमान बना आज फ़िर असफल रहा।
उसकी डोली उसकी डोली
उन सभी बलात्कारियों को फांसी पर लटका दे। उन सभी बलात्कारियों को फांसी पर लटका दे।
सर्द सर्द रातों में अकसर बिस्तर में यूं जिस्म को कसकर आंखों में अश्कों को मसलकर यादों के कुएं में... सर्द सर्द रातों में अकसर बिस्तर में यूं जिस्म को कसकर आंखों में अश्कों को मसलक...
यह कैसा लोकतंत्र हमारा ? और यह कैसे आजादी हमने पायी हैं। यह कैसा लोकतंत्र हमारा ? और यह कैसे आजादी हमने पायी हैं।
चांदनी को बिखेरेगा अपने इस उजड़ते वीरान, परेशान गांव को पहले की तरह। चांदनी को बिखेरेगा अपने इस उजड़ते वीरान, परेशान गांव को पहले की तरह।
कैसी ये इंसानियत तूने बनाई है कि आज इंसान ही इंसान को मार रहा है। कैसी ये इंसानियत तूने बनाई है कि आज इंसान ही इंसान को मार रहा है।
साथ देंगे एक दूसरे का अब हम, करे नई शुरुआत। साथ देंगे एक दूसरे का अब हम, करे नई शुरुआत।
तभी चिल्लाने की आवाज आई- छोटू जल्दी से चाय ला। तभी चिल्लाने की आवाज आई- छोटू जल्दी से चाय ला।
कितने संसाधनों को खो चुके मेरी नज़र में साल 2040 कुछ ऐसा होगा। कितने संसाधनों को खो चुके मेरी नज़र में साल 2040 कुछ ऐसा होगा।
वादों की डोलियां ऊठी थी कभी आज उनके जनाजों की कतार भी देख ली। वादों की डोलियां ऊठी थी कभी आज उनके जनाजों की कतार भी देख ली।
भेजें थे मैंने इन्सान कैसे हो गये शैतान। भेजें थे मैंने इन्सान कैसे हो गये शैतान।
चुकानी पड़ती है क्या लोकलाज हमें अपने बच्चों से भी ज्यादा प्यारी है। चुकानी पड़ती है क्या लोकलाज हमें अपने बच्चों से भी ज्यादा प्यारी है।
तन-मन भर जाएंगे सब उभरेंगे दर्द के जज्बात। तन-मन भर जाएंगे सब उभरेंगे दर्द के जज्बात।
एक जिन्दा लाश ही मेरा जीवन रह गया है। एक जिन्दा लाश ही मेरा जीवन रह गया है।
हम भी क्या इनकी हिफ़ाज़त के लिये यूँ ही शहीद हो जाते हैं। हम भी क्या इनकी हिफ़ाज़त के लिये यूँ ही शहीद हो जाते हैं।