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Manju Rai

Inspirational

4  

Manju Rai

Inspirational

वह पेड़

वह पेड़

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वह पेड़

वह पेड़ खड़ा रहा ,

तपती धूप में तपता रहा 

अपनी ज़मीं से जुड़ा रहा ,

अपनों की सुख की खातिर ,

पल - पल मौसम की मार सहता रहा ,

वह पेड़ खड़ा रहा I

शाखाएँ बढ़ती रही ,

औ वह सबको छाया देता रहा ,

टूटकर भी सबकी छत बना रहा ,

स्वयं जलकर राख हुआ ,

किंतुं सबकी क्षुधा मिटाता रहा ,

वह पेड़ खड़ा रहा I

स्वार्थलोलुप अपनों ने ,

आज नाता तोड़ दिया ,

पर फिर भी वह सब पर ,

सुमन स्नेह बरसाता रहा ,

वह पेड़ खड़ा रहा I

आज है अकेला वह ,

बन गया है एक ठूँठ ,

तक रहा अपनों को ,

कोई फिर उसकी सुधी लेगा ,

प्यार की शीतल छाया ,

फिर अपनों से मिलेगी ,

इसी आस में वह सारा जीवन बिताता रहा I

वह पेड़ खड़ा रहा .......

संसार के हर कर्तव्यनिष्ठ एवं परिवार के प्रति समर्पित हर पिता को समर्पित।



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