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Sarvesh Saxena

Drama Fantasy

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Sarvesh Saxena

Drama Fantasy

वैदेही

वैदेही

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202

वैदेही को छल से हर के, 

ले आया निज धाम, 

अज्ञानी पापी रावण को, 

नहीं जरा भी भान… 


कर विलाप बैठी वैदेही, 

जपती हैं श्री राम, 

शीघ्र आर्य सुत आ जाओ तुम, 

वैदेही निष्प्राण … 


करो विनाश अधर्मी का इस, 

करो जगत कल्याण, 

रामचंद्र जी चले हैं हरने, 

लंकेश्वर के प्राण…. 


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