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Shiv Kumar Gupta

Romance

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Shiv Kumar Gupta

Romance

उसके जाने के बाद

उसके जाने के बाद

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वो पगली सी लड़की आज फिर याद आ रही है

मायूसी उसकी मुझे उसकी ओर खिंचे जा रही है


सांवली सूरत और उसके गालों का वो तिल

जब भी देखूं उसे हार जाता हुं मेरा दिल


आंखे नशीली और चाल उसकी मस्तानी है

रेशम सी जुल्फें और अदाएं उसकी निराली है


हां दिखती थोड़ी मोटी है पर क्यूट वो लगती है

छोटी छोटी बातों पर बच्चों जैसा रूठ वो जाती है


कटीला बदन उसका ऊपर से पहनी उसने साड़ी है

मर जाऊं खाकर उसे ऐसी ज़हर वो लगती है


हां प्यार था बहुत ना छोड़ने को दिल करता था

अपने दिल में तस्वीर बनाऊं उसकी ऐसा मन करता था


पर ये अधूरा इश्क मेरा एक दिन तो मिट ही जाना था

उस मासूम का ख्याल ना रख पाया मुझे तो टूट ही जाना था


बात जब वो नही करती थी दिल उदास सा रहता था

उससे बात होते ही दिल खुशी के मारे उछल पड़ता था


हर दुख दर्द भूल जाता था जब बात उससे होती थी

उसके साथ मीठी नोक झोंक मेरा दिल खुश कर जाती थी


मैं फिक्र आज भी उसकी उतनी ही करता हुं

बस प्यार जताने का हक मैं खो चुका हुं 


दिल में एक तस्वीर आज फिर से उसकी बनाई है

उसके जाने के बाद उसी की यादों पे कलम चलाई है।


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