STORYMIRROR

Shiv Kumar Gupta

Abstract

4  

Shiv Kumar Gupta

Abstract

बेटियां

बेटियां

1 min
263

बेटी है ईमान मेरा 

बेटी मेरी जिंदगी

बेटी से ही घर बने 

बेटी होती घर की लक्ष्मी 


बेटी घर का दीपक है 

रोशन करती घर संसार को

घर के लिए वरदान है ये

सम्मान दिलाए परिवार को


लक्ष्मी की चाह सभी को है

पाने को उसे भागे ये दुनिया

पर लक्ष्मी स्वरूपा बेटी को

गर्भ में ही मारे ये दुनिया


बेटी हँसे तो फूल खिले 

घर में खुशियां लाती है बेटियां 

दो–दो घरों को तारकर 

उन्हें संवारती है ये बेटियां


बेटी पिता का अभिमान है

पराया नहीं ये धन होती है अपना

बेटी नहीं जनोगे तो 

कहां से लाओगे मां की ममता


बेटियां देश का मान बढ़ाती

हर खेल में मेडल जीत के लाती है

सरहद पे खड़ी हिंद की वीरांगना 

लक्ष्मी बाई सी दुश्मन से भिड़ जाती है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract