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V. Aaradhyaa

Tragedy

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V. Aaradhyaa

Tragedy

उस आँगन में चाँदनी छितराई है

उस आँगन में चाँदनी छितराई है

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एक उस आँगन में चाँदनी छितराई बैठी।

इस ओसारे तक तो रोशनी ही नहीं जाती।


मौत से कोई दोस्ती की नहीं जाती।

ज़िंदगी ऐसी है कि अब जी नहीं जाती।


बाहर इस क़दर मौसमों की दहशत है।

दूर दूर तक अब हमारी नज़र नहीं जाती।


अब हम खड़े हैं जहाँ अपनी प्यास लिए।

उस जगह तक तो कोई नदी ही नहीं जाती।


बारहा सिर्फ़ सड़कों पे हुजूम करने से क्या।

जब घर से अकेलापन, उदासी नहीं जाती ।


दिल की वो जो एक हसरत है चाँद लाने की।

चाँद तक तो कोई भी सीढ़ी ही नहीं जाती।


इब बे-वजह के कोई भी बात करे आख़िर।

तो हद से ज़्यादा कोई बात सही नहीं जाती।



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