STORYMIRROR

सोनी गुप्ता

Tragedy

4  

सोनी गुप्ता

Tragedy

उन आँसुओं का हिसाब

उन आँसुओं का हिसाब

1 min
409

इस जख्म का देगा कौन ज़वाब

नहीं लगा सकता कोई उन आँसुओं का हिसाब

दिलों में भरा है दुखों का गुब्बार

किया माँ ने देश पर अपना पुत्र बलिहार।


इस जख्म का देगा कौन ज़बाव

नहीं लगा सकता कोई उन आँसुओं का हिसाब

छिन गई लाठी बुढ़ापे की

उजड़ गया सुहाग पत्नी का

माँ रोती कहती।


कहाँ गया तू बच्चे करते चीख़ -पुकार

चारों ओर फैला है

ये कैसा चित्कार ये कैसा चित्कार

इस जख्म का देगा कौन ज़बाव।


नहीं लगा सकता कोई उन आँसुओं का हिसाब

वादा कर गया पत्नी से वापस फिर आऊँगा

अपने लाडले को आकर फिर गोद में बिठाऊंगा

वो बुन रहा सपने पापा के आने का।


रो रहा अब दुख है उनके जाने का

इस जख्म का देगा कौन ज़वाब

नहीं लगा सकता कोई उन आँसुओं का हिसाब।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy