STORYMIRROR

Jyoti Verma

Fantasy

4  

Jyoti Verma

Fantasy

उम्र की इकाइयाँ, दहाइयँ

उम्र की इकाइयाँ, दहाइयँ

1 min
302

उम्र की इकाइयाँ, दहाइयाँ बढ़ती चली

मन की शून्यता संवरती रही

कसक इकाइयों दहाइयों संग डूबने की

शून्यता से संवरने लगी


कभी ईकाई दहाई शून्य से हारती

तो कभी ये शिथिलता बन शून्य को डराती

तन शिथिल हो डराने लगा

निकम्मा, मन को हराने चला


पर मन तो मन है

पंख इसको बड़े गज़ब लगे

वो तो

हर इकाई दहाई से परे हो उड़े !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy