उलझन दिल की
उलझन दिल की
टूटा है दिल आज,
पर कोई आवाज़ नहीं है,
कहने को बहुत कुछ है,
लेकिन सुनने को कोई कान नहीं है!!
जिसे चाहा हद से ज्यादा,
मिलता है दर्द भी उनसे सबसे ज्यादा!!
उनके के लिए सब है जरुरी मुझे छोड़ कर,
मेरे लिए सिर्फ वोह है जरुरी बाकि सब छोड़ कर !!
दिल के बारे में सुना था बहुत,
पर गुजरे है अब इस दोर से!!
उनकी नाराजगी है खलती,
यही उम्मीद बस रहती,
शायद उन्हें भी कभी हमारी कमी खलती!!
हमारी मुस्कान के पीछे भी तनाव न होता,
उनके होते हुए भी हमे अकेलापन न खलता,
काश, दिल के आगे न होते हम मजबूर,
तो न होते हम ऐसा चकनाचूर!!
अच्छा होता अगर,
दिल या दिमाग दोनों में से एक ही होता,
क्यूंकि इनका टकराव है इतना गहरा,
हम सोचते और समझाते ही है रह जाते,
अपने आप को,
और वक़्त हाथ से निकल जाता!!
खुदा से यही है एक दरखास्त,
जिस के लिए आज मेरा दिल है रोया,
उस दिल में भर दो ख़याल जरा सा मेरा!!
यह दिल है बड़ा अजीब ,
आज है अनबन,
पर एक बार प्यार से जो उन्होंने बोला,
यह दिल धड़कने लगेगा फिर पहले जैसा!

