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Kavita Sharrma

Abstract

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Kavita Sharrma

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उजाले की हिमायत में

उजाले की हिमायत में

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अंधेरे ने कितना ही

दिखाना चाहा अपना रुतबा 

अपने स्याह रंग से भले ही


बसाना चाहा हो मनों में खौफ 

उजाले की इक ही किरण काफी है 

स्याह अंधकार को मिटाने के लिए।


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