तूफान में भी
तूफान में भी
तूफान में भी जो टकरा जाते हैं,
बहती हुई प्रचंड तीव्र हवाओं से।
मंजिल से मुलाक़ात भी वही करते,
गुजरते हैं सदा मुश्किल भरी राहों से।
सुनामी में भी जो झेल जाते हैं,
समन्दर की दहाड़ती लहरों को।
सौगात में भी वही तो पाते हैं,
आखिरी पड़ाव पर साहिल को।
सोचो सरहद पर खड़े हुए,
उन जांबाज वीरों की बात।
होती है सीने पर जिनके,
दिन रात गोलियों की बरसात।
जो झेल जाते हैं सीने पर,
गरजती हुई दुश्मनों की गोलियाँ।
बेटा होता सरहद पर शहीद,
रोती माँ की ममता की झोलियां।
सच्चा सैलानी वही होता है,
जो नहीं डरे कभी लहरों से।
सच्चा सैनिक वही है यारों,
जो न डरे गोली की बौछारों से।
पिया दूध उसने माँ का,
क्या बिगाड़े तूफान उसका।
डटा रहता वो अडिग,
उड़ता तूफान बनकर तिनका।
तुम वीर हो, हो देश के सिपाही,
बढ़े चलो, बढ़े चलो, हो कर निडर।
देशभक्ति का जज़्बा बने,
तुम्हारी देह का जिरह- बख्तर।
झेल लो हर तूफान को,
बनकर तुम प्रचंड हिमालय।
सरहद को बना लेना तुम,
अपनी आस्थाओं का शिवालय।
