STORYMIRROR

Shreeya Dhapola

Drama

3  

Shreeya Dhapola

Drama

तू अकेली ही काफी है

तू अकेली ही काफी है

1 min
258

तू अकेली ही काफी है अपने लिए

तू अकेली ही लड़ सकती है अपने लिए


चरागों को अक्सर बुझाती है हवाएं

तू अकेली ही जला सकती है लौ अपने लिए


तोड़ता है ये जहां भरोसा हर कदम पर

तू अकेली ही तय कर सकती है मंज़िल अपने लिए


ये दुनिया वार करती है कमजोरियों पर

तू अकेली ही बन सकती है ताकत अपने लिए


अरे तू डर मत इन आने वाले तूफ़ानों से

तू अकेली ही रुख मोड़ सकती है इनका अपने लिए।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama