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Praveen Gola

Romance

5.0  

Praveen Gola

Romance

तुम्हें पाने को

तुम्हें पाने को

1 min
421


बाहर बरसात,

भीगे अंदर मन,

तुम्हें पाने को।


ये मौसम का,

बदलता मिजाज,

तपती अगन,

माँगे संगम,

भीगे अंदर मन,

तुम्हें पाने को।


थोड़ा इशारा,

कुछ देर नजारा,

प्यासे अधर,

भटके नयन,

भीगे अंदर मन,

तुम्हें पाने को।


एक तनहाई,

मुझमें समाई,

चारों तरफ,

तेरा दर्पण,

भीगे अंदर मन,

तुम्हें पाने को।


दबती ख्वाहिश,

वक्त नादान,

फिर कभी हो,

अपना संगम,

भीगे अंदर मन,

तुम्हें पाने को।


रुकती बरसात,

शिथिल तन,

एक तूफान,

भरे अपना दम,

भीगे अंदर मन,

तुम्हें पाने को।


बाहर बरसात,

भीगे अंदर मन,

तुम्हें पाने को।


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