तुम्हारी आखिरी मोहब्बत..!
तुम्हारी आखिरी मोहब्बत..!
तुम्हारी आखिरी मोहब्बत,
भले हीं हम ना हों,
पर हमारी आखिरी मोहब्बत,
तो सिर्फ तुम हीं हों,
हमने जाना हैं, तुम्हें पहचाना हैं
पर फिर ये रिश्ता,
आज़ भी जाना अनजाना हैं,,
तुम कहते हो हमसे,
कि तुम्हें हमारी बातें पसंद हैं
पर हमें तो हमेशा से हीं,
तुम्हारे मुलाकातें पसंद हैं,,
जब मिलते हों तुम हमसे सपनों में,
तो सपने भी अच्छे लगते हैं,
पर जब आते हों सामने हकीकत बनकर,
तो ना जाने हमारे दिल में,
कितने फूल खिलते हैं,
हमें गिनती नहीं आती, अपनी खुशियों की
क्योंकि तुम्हारा सामने आना हीं,
हमारी असंख्य खुशियों का राज़ हैं,,
तुम चाहो या ना चाहो,
पर हमें अपनी चाहत पर,
आज़ भी बहुत नाज़ हैं,
जिससे हमारी जिंदगी, एक सुरमय साज हैं,
और बहुत सुन्दर आज़ हैं,
और बहुत सुन्दर आज़ हैं।

