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Rudra Prakash Mishra

Romance Classics

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Rudra Prakash Mishra

Romance Classics

तुम्हारा इश्क़

तुम्हारा इश्क़

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भर लूँ 

एक घूँट।

लूँ, 

एक गहरी साँस,

सुकून से।


और, 

भूलते जाऊँ 

धीरे - धीरे 

अपने सभी ग़म,

फिक्र, थकन।


लगे जैसे 

हो गया हूँ, 

फिर से 

नया।


तुम्हारा इश्क़, 

एक गर्म प्याली हो

चाय की जैसे।


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