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Manoj Kumar

Action Thriller

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Manoj Kumar

Action Thriller

तुम  न  सही  कोई  और  सही

तुम  न  सही  कोई  और  सही

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वो  मुझसे है, हम उनसे है क्या  फिकर  तुझे

क्या उनके जैसा हमराह, इस दुनिया में कोई होगा

तुम फैलाओ जितना भी हो अपने आँखों के मोती

जो खुदाया बैठा है, वो मुझसे मोहब्ब्त करता होगा


तुम  रख़ लो मेरी इक छोटी- सी हँसी

जब बिछड़ेंगे तुझसे कल तुम गम  पाओगी

वो कल का सूरज डूब जायेगा यूँ ही तेरा

जब  तुम  मेरी  आशिकी  याद  करोगी


तेरा  जितना  भी  है  जिद  वो कम  है

अभी कहाँ देखा दिल मेरा, तुम डर जाओगी

मेरे  जैसा  तो तुम्हें  कई  मिलेंगे पागल

पर मेरे जैसा तुम कहाँ प्यार कर पाओगी


हम  तेरे अपने थे कोई ग़ैर तो  नहीं

जो तुम रोकर मेरे दिल को पिघला दोगी

मैं  कोई वो  गुलदस्ते  के  फूल नहीं

जो  मुझे  तोड़के यूँ  ही  बहा दोगी


मैंने सोचा था मेहरबाँ है मंज़िल अपनी

क्या  कोई  राहें  पिटी  थोड़ी  होगी

वो तो कायनात थे यूँ ही अपने- अपने

क्या तुमने कोई जगह छोड़ी थोड़ी होगी


अभी  तो  तकरार  है ऐ  लब्जो  का

क्या कोई  कहानी  फिर से  लिखनी है

अभी तो बदले हैं सितारे तेरे आसमाँ से

कल तो मोहब्बत फिर से दोहरानी है।


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