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Manoj Kumar

Romance Others

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Manoj Kumar

Romance Others

तुम न देखो मुड़ मुड़कर।

तुम न देखो मुड़ मुड़कर।

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कहीं तुमसे प्यार न हो जाए

कहीं बेचैन न हो जाए तुम्हारी नजरें मुझे देखने के लिए

कहीं किसी का दिल तोड़कर न आ जाओ मेरे पास

तुम अपनी बांहों में आगोश से चिपकाने के लिए


डूबी रहो मेरे ख्यालों में अकेली रहकर

तुम्हें सोने न दे मेरी मुलाकातें रातों में

तुम करवट बदल कर खोई रहो मेरे आहट से

तुम सोच- सोचकर पागल हो जाओ हर बातों में


ढूंढे मुझे तुम्हारी आंखें सपनों में भी

याद में रहो मेरे हर पल, देर के उठे सोकर

सफर कटे तुम्हारी मेरे ही मोहब्बत में

जो तुम मुझे देख लो, एक बार होकर


मुझे मुड़ मुड़कर न देखो इस तरह

कोई देख लेगा तो, मुझसे तुमसे प्यार हो जाएगा

खरीदार बन जाऊंगा तुम्हारे होंठों के

जो छिपकर मुड़कर देखती हो, इकरार हो जाएगा


छाएगी खुमारी इश्क की बार- बार

तुम दौड़ कर आओगी इक पल मेरे बिन नहीं रह पाओगी

सताएगी मेरी परछाई तुम्हें, तुम डूबी रहोगी मेरे ख्यालों में

करवटें बदल- बदल तुम रात काटोगी।


 


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