Aishani Aishani
Fantasy
तुम कहो क्या लिखूँ..?
कलम ख़ामोश नहीं
अल्फाज़ मुझसे कुछ
ख़फ़ा ख़फ़ा से हैं..!
केवल आप ही पा...
तुम सूरज सा ब...
रूप का चाँद.....
लिखना चाहती ह...
भूल गई हूँ..!...
धारा के विरुद...
तुम्हारी पसन्...
शिखर..!
सुनो राम..!
उसने ख़ुद को ...
झूम उठते है पेड़-पौधे नई अंकुर देती है, तेरे बरस भर जाने से झूम उठते है पेड़-पौधे नई अंकुर देती है, तेरे बरस भर जाने से
आया न कुछ भी हमको कभी इश्क़ के सिवा बस यूँ ही काम वाम में रक्खे हुए हैं हम ! आया न कुछ भी हमको कभी इश्क़ के सिवा बस यूँ ही काम वाम में रक्खे हुए हैं हम !
आने वाला वक्त क्या होगा पता नहीं पर सतत संग्राम के बोल अभी गूंजेंगे बहुत जोर आने वाला वक्त क्या होगा पता नहीं पर सतत संग्राम के बोल अभी गूंजेंगे बहुत ज...
अधूरी आशाओं के साथ जीना भी क्या जीना है! अधूरी आशाओं के साथ जीना भी क्या जीना है!
निराशा के गर्त से उभरने के लिये प्रति पल प्रयासरत रहता है, निराशा के गर्त से उभरने के लिये प्रति पल प्रयासरत रहता है,
यह महकते भी हैं प्यार के अहसास से ऐसी अनुभूति तो इनके दिल में समाकर ही होगी यह महकते भी हैं प्यार के अहसास से ऐसी अनुभूति तो इनके दिल में समाकर ह...
भक्त भगवान को कर देते हैं आस्था की प्रतिमूर्ति..... भक्त भगवान को कर देते हैं आस्था की प्रतिमूर्ति.....
हर्ष उल्लास से कट जाती है जज्बा-जुनून हो तन मन..... हर्ष उल्लास से कट जाती है जज्बा-जुनून हो तन मन.....
उसकी इस संतुष्टि को देखकर न जाने क्यों मन बहुत रोया मेरा आज, उसकी इस संतुष्टि को देखकर न जाने क्यों मन बहुत रोया मेरा आज,
कहाँ से शुरु कहाँ ख़त्म होगी ये कहानी प्रेम की दुनिया में बड़ा बवाल कर गया कहाँ से शुरु कहाँ ख़त्म होगी ये कहानी प्रेम की दुनिया में बड़ा बवाल कर गया
ना करती थी इबादत, अब जुड़ते हाथ है प्रार्थना को। ना करती थी इबादत, अब जुड़ते हाथ है प्रार्थना को।
अंगड़ाइयों से आमंत्रण देना किसी न किसी बहाने से मेरे इर्द गिर्द चक्कर लगाना अंगड़ाइयों से आमंत्रण देना किसी न किसी बहाने से मेरे इर्द गिर्द चक्कर ल...
देकर ज़ुबान अपने कलम को, हो जाऊँ एक दिन मैं मशहूर.. देकर ज़ुबान अपने कलम को, हो जाऊँ एक दिन मैं मशहूर..
ना उम्मीद की कोई आस जगने पाई है..... ना उम्मीद की कोई आस जगने पाई है.....
इसकी सजा इसके मानसिकता और कर्मों पर हो मानव धर्म यही कहता है इसकी सजा इसके मानसिकता और कर्मों पर हो मानव धर्म यही कहता है
छुपकर जीवन की सच्चाई से, आ कर ले कुछ नींद चोरी... छुपकर जीवन की सच्चाई से, आ कर ले कुछ नींद चोरी...
जुल्फ ए हसीन, सेब ए जखन, व शीरिं लब तेरे की तू समा गया हम में, हम समाए तो समाए कैसे जुल्फ ए हसीन, सेब ए जखन, व शीरिं लब तेरे की तू समा गया हम में, हम समाए तो समा...
किसी दीवाने से उसके नैन टकरा गये दिन का चैन रातों की नींदें उड़ा गये किसी दीवाने से उसके नैन टकरा गये दिन का चैन रातों की नींदें उड़ा गये
अद्भुत है मेरी प्रकृति की माया। पूरी सृष्टि जिसके आंचल में है समाया। अद्भुत है मेरी प्रकृति की माया। पूरी सृष्टि जिसके आंचल में है समाया।
तुम्हारी यादों की ढेरों रंगबिरंगी तितलियां तुम्हारी यादों की ढेरों रंगबिरंगी तितलियां