STORYMIRROR

Krishna Khatri

Romance

3  

Krishna Khatri

Romance

तुम जो नहीं हो !

तुम जो नहीं हो !

1 min
221


जिन्दगी पहले थी 

अब भी है 

मगर अब जिन्दगी में

वो पहले जैसे 

रंग नहीं, 

रंगोली नहीं,

पहले जैसी तो 

वो उमंग भी नहीं 

तुम जो नहीं हो!

जाने क्यों खफ़ा हो मुझसे,

अब तो हरदम

दिल ढूंढता है तुमको !

          


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance