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Rati Choubey

Romance Tragedy

4  

Rati Choubey

Romance Tragedy

तुम आहुति बन उतरे -

तुम आहुति बन उतरे -

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प्रेम यज्ञ की ज्वाला में

तुम आहुति बन उतरे 

रही सुवासित पीड़ा मेरी

अंग-अंग हुआ आनंदित

रोम रोम में बसा गया "तू"

आहुति सा "तू"

ज्वाला तो भड़की प्रिय 

फिर -----

जब जब उतरे "तुम" 

" आहुति " बन 

प्रेम यज्ञ की ज्वाला में तुम

लिपट गई "आहुतियां "

भी --

मेरे अंग -प्रत्यंगो से 

धीरे-धीरे

शांत हो गई जब 

बढ़ती हुई वे ज्वालाएं

बच गई "बस"

प्रेम -यज्ञ के कुंड में 

पड़ी हुई थी -

मेरी-तेरी 

भस्मदेह 

भावविभोर निर्लिप्त सी 

हो

एकरस।



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