Rati Choubey

Inspirational


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Rati Choubey

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जिंदगी खेल नहीं----

जिंदगी खेल नहीं----

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"‌‌ ऐ" ज़िंदगी रुक जा ज़रा

ना "शिकवा" ना "शिकायत"

‌ " ऐ" ज़िंदगी तुझसे

‌ सुन---- ‌

जब पास थी "मेरे"

तेरी "कद्र" ना की मैनें

बेखुदी में चलती रह " मै"

अब ---

जब हर पल

‌ "तू" ‌‌‌‌‌दूर होती जा रही

तो "कद्र" तेरी जान पाई

अब समझी --

"ज़िंदगी " एक "रंगमंच" है

हम सब तो "कलाकार"

जैसा वो नचाये नाचे


कोई कहे ज़िंदगी "खेल"

कोई कहे यह "उपहार"

कोई कहे यह "यात्रा"

कोई कहे बस " दौड़"


‌ ‌‌‌ हम तो "कठपुतली" हैं----

जैसा नचाने "ज़िंदगी "

"ज़िंदगी " अपरिभाषित"

विभिन्न पहलुओं पे टिकी

विचारों का खेल " ज़िंदगी "

जो समझे वहीं है "ज्ञानी"

मुझे---+

एक "बौखलाहट" सी

हर समय ही रहती

दौड़ कर थाम लूं "ज़िंदगी "

पर वो तो जा रही भागती

‌‌‌‌। सुनो तुम भी ---

‌ ईश्वर की देन ""ज़िंदगी "

‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌। सकारात्मक, नकारात्मक

‌‌‌ दो सोच है -----जीने के

कैसे जीना तुम्हैं "ज़िंदगी "


सुकून की बिताओ "ज़िंदगी "

"दूभर" ना करो किसी की "ज़िंदगी "

एक दर्दीली छुवन से किसी की

बर्बाद ना करो कभी"ज़िंदगी "


लूटपाट, मौतें,स्वार्थता

भ्रष्टाचार, लोलुपता,असत्य

"मज़हबो" के दायरों में बंट

"हवसता" में ना समेटो "ज़िंदगी "


अपनी "पहिचान" बनाओं

मत करो "विध्वंश" का ताण्डव

"प्रेमरिक्त " व्यक्तित्व" ना करो

"मानवता" से सींचो "ज़िंदगी "


थको तो तुम "सुस्ता" लो

पर "हमसफर" है "ज़िंदगी "

"संत्यमेव जयते" का करो घोष

"शंखनाद" से मधुसिक्त करो "ज़िंदगी "


दुबारा ना मिलेगी "ज़िंदगी "

ईश्वरीय प्रसाद "ज़िंदगी "

गति सुधारों ,मति सुधारों

एक बार मिलती "ज़िंदगी "



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