तुझे राम कहूं कि कहूं रहीम
तुझे राम कहूं कि कहूं रहीम
तुझे राम कहूं कि कहूं रहीम
छुपा कहां है फ़लसफ़ा तेरी रज़ा का
तुझे राम कहूं कि कहूं रहीम
कोई झुका है चौखट किसी पे ,
कोई खड़ा है वंदन में किसी के
कोई बना है मुहाफिज तेरी बका का
तुझे राम कहूं कि कहूं रहीम
छुपा कहां है फ़लसफ़ा तेरी रज़ा का
तुझे राम कहूं कि कहूं रहीम
कोई पत्थर के खंडहर बना कर
कोई मर्दानी खंजर चला कर,
जज्बा दिखा रहा तेरी वफ़ा का
तुझे राम कहूं कि कहूं रहीम
छुपा कहां है फ़लसफ़ा तेरी रज़ा का
तुझे राम कहूं कि कहूं रहीम
आदम की औलाद में कोई
अक्स तेरा दिखा रहा
तू तख्तो नसी है आसमां में,
कोई ये बता रहा
आखिर छिपा कहां सूरज इस
फिज़ा का तुझे राम कहूं कि कहूं रहीम
छुपा कहां है फ़लसफ़ा तेरी रज़ा का
तुझे राम कहूं कि कहूं रहीम
ये खिताबों में तेरा
है वजूद जो बताया
उसी को है बचाना,
सभी के दिलों में यही है छाया
रहीम भी डरा रहा,
मंज़र देख तेरी सजा का
तुझे राम कहूं कि कहूं रहीम
छुपा कहां है फ़लसफ़ा तेरी रज़ा का
तुझे राम कहूं कि कहूं रहीम।
