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Dr Jogender Singh(jogi)

Abstract

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Dr Jogender Singh(jogi)

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टोटेवाला

टोटेवाला

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टोटे उठा कर धीरे से जेब में भरता 

कोने में बैठ पीने के यत्न में।


दहकते अंगारे से बार बार सुलगा 

कश खींचने की कोशिश में,


किस किस की झूठन को प्रेम से होंठों के बीच दबाता

आधी अधूरी खिचड़ी दाड़ी को खुजाता।


उसकी ज़िंदगी की तरह आधी /अधूरी

हाँक कर ले जाना अपना बना कर सवेरे सवेरे।


साँझ को पराया हो जाना

किस यतन से, सब जतन से।


दूसरों की ज़िन्दगी खूबसूरत बनाता रोज़

चुपके चुपके टोटे उठाने वाला कर्मयोगी। 


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