STORYMIRROR

Payal Khanna

Abstract

4  

Payal Khanna

Abstract

मेरी टीचर

मेरी टीचर

1 min
589

जब बच्चे थे वह तब भी मेरे पास थी

जब बड़े हुए तब भी वह मेरे साथ थी

कभी डांटती तो कभी खूब हंसाती थी

कभी बनकर दोस्त की तरह वह हम पर जान भी लुटाती थी


कभी अपने बच्चों की तरह वह हमें भी संभालती थी

 कभी चोट लगने पर मां की तरह ही वह घबरा जाती थी

मां-बाप की तरह ही हमें वह कितने समय हंसते-हंसते सह जाती थी

हमसे दूर जाकर उसकी आंखें भी तो नम हो जाती थी


 हर कक्षा में हमें जो खूब पढ़ाती थी

सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं हमें जिंदगी का ज्ञान भी समझाती थी

पेरेंट्स टीचर मीटिंग में जो अच्छी बुरी बातें दोनों बताती थी

कभी दुख में जो हमें अपने पास से चॉकलेट भी दी जाती थी

 स्कूल की सच्ची पहचान उसी से ही तो हो पाती थी


 वह और कोई नहीं 

मेरी प्यारी टीचर थी।।

 वह और कोई नहीं

 मेरी प्यारी टीचर थी ।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract