चार जून की सुबह बीती निराली ,
जब सैर पर मिली अमलतास की क्यारी ,
चारों ओर बिखरे थे फूल अमलतास के ,
गर्मी आ गई है ऐसे अनोखे आभास थे |
दोपहर में पिया मठ्ठा निराला ,
हाजमा हो कर भोजन पचा सारा ,
गर्मी में सबको पीना चाहिए खूब पानी ,
ताकि बीमारियों से लड़ सके ज़वानी |
रात में बैठ परिवार के संग ,
थोड़ी मस्ती तो थोड़ी उमंग ,
जल्द कोरोना से सबको निजात मिलेगी ,
अब टीकाकरण की सुविधा घर - घर मिलेगी ||