STORYMIRROR

Sampoorna Raj

Drama

3  

Sampoorna Raj

Drama

ठंड का मर्ज

ठंड का मर्ज

1 min
550

सर्दियों में था हाल बेहाल

मानव जीवन था बदहाल।


सिकुड़ रहा था मानव जीवन

ठिठुर रहा था मानव तन।


मुरझा रहे थे पेड़ बेचारे

कांप रहे थे बच्चे सारे।


अब तो चारों ओर त्राहि त्राहि

कहां गए हो सूरज भाई।


बचाओ हम सभी की जान

हम सब हैं बहुत ही परेशान।


कोहरे की मोटी चादर ने

सूरज का दरवाजा रोक रखा था।


मानव ने भी घर की खिड़की से

ठंड का दरवाजा रोक रखा था।


ठंड ने भी जोड़ लगाया

खिड़की और दरवाज़े से भीतर आया।


कहीं दूर पर लोगों ने देखा

जलती हुई आग की लौ।


फिर एक साथ लोग मिलकर

बोले यही है "ठंड का असल मर्ज"!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama