STORYMIRROR

Kanchan Prabha

Abstract Classics Fantasy

3  

Kanchan Prabha

Abstract Classics Fantasy

टेलीविज़न

टेलीविज़न

1 min
196

टेलीविजन ऐसा साधन है 

1927 से जुड़ा ये बंधन है 

कभी क्रिकेट मैदान ले जाता 

घर बैठे ताजमहल दिखलाता


चैनल लगते है कई हजार

 संगीत सुनो कभी समाचार 

बच्चे कार्टून देख कर झूमे

हम भी पूरी दुनिया घुमे


बच्चे बुढों का साथी प्यारा

 महिलाओं को भी लगता न्यारा

ब्रह्माण्ड की सैर करा दे

ज्ञान का हमें पाठ पढ़ा दे


इस पर कर लो खरीदारी

कभी बर्तन तो कभी सारी

बेयर्ड तुने क्या चीज बनाई

डब्बे में पूरी दुनिया सजाई।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract