Israram Panwar
Drama
तरु मरुधर में लगाओ
विटप को वल्लरी से सजाओ
कलरव हो डाली डाली
नभ में उड़े चटकाली
बरसे घटा काली काली
जन मन हरसे आली
खेत खलिहान को लहराओ।
मेरा मजल (मेर...
पंछी
तरु मरुधर में...
लोरी
मुझे पसंद है
हाइकु
बसंत की चाह
वे दिन
बूंद बूंद
मन
कि चले जाओ वही जहाँ ये रूह-ए-एहसास, अब रहती नहीं। कि चले जाओ वही जहाँ ये रूह-ए-एहसास, अब रहती नहीं।
इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी। इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी।
लंका में अग्निकांड भी मैं था लंका में अग्निकांड भी मैं था
इस कम्प्यूटर युग में उसके सपनों का महत्व ही क्या है ! इस कम्प्यूटर युग में उसके सपनों का महत्व ही क्या है !
मेरे हालात का क्या तुझे हैं पता ? आज तू मुझे सच में ये बता...! मेरे हालात का क्या तुझे हैं पता ? आज तू मुझे सच में ये बता...!
कुछ पाने की उम्मीद लेकर अंधेरे में ही चल देता है वो। कुछ पाने की उम्मीद लेकर अंधेरे में ही चल देता है वो।
जद्दोजहद इस, बात की है खुद से, की मैं खुदा से माँगू, या भगवान से माँगू...! जद्दोजहद इस, बात की है खुद से, की मैं खुदा से माँगू, या भगवान से माँगू...!
किसी को प्रेम लिप्त करा दे, और परलोक भिजवा देता पैसा। किसी को प्रेम लिप्त करा दे, और परलोक भिजवा देता पैसा।
हाँ नही बनी मैं कविता के लिए इसलिए कथा लिख जाती हूँ। हाँ नही बनी मैं कविता के लिए इसलिए कथा लिख जाती हूँ।
अगर तुम्हारे मन में आये कभी कोई प्रश्न तो पूछना इस जहां के लोगों से. अगर तुम्हारे मन में आये कभी कोई प्रश्न तो पूछना इस जहां के लोगों से.
एक वादा करना हैं तुमसे, एक घर बनाना हैं अपना...! एक वादा करना हैं तुमसे, एक घर बनाना हैं अपना...!
ऊपर वाले का कोई कसूर हूँ ! हाँ, मैं एक मजदूर हूँ, मैं मजदूर हूँ ! ऊपर वाले का कोई कसूर हूँ ! हाँ, मैं एक मजदूर हूँ, मैं मजदूर हूँ !
गर एक क्षण भी मिला नहीं हूँ, फिर सौ बार मिलूँगा मैं... गर एक क्षण भी मिला नहीं हूँ, फिर सौ बार मिलूँगा मैं...
अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर ! अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर !
इस द्रौपदी की गिरधारी तक काहे ना पहुंचे पुकार है, इस द्रौपदी की गिरधारी तक काहे ना पहुंचे पुकार है,
क्या दिया है इस, लड़कपन के प्यार ने ? क्या दिया है इस, लड़कपन के प्यार ने ?
किसी के आँसू पोछोगे जब, पास मुझे ही पाओगे...! किसी के आँसू पोछोगे जब, पास मुझे ही पाओगे...!
मुझ से क्या पूछते हो, पता इश्क़ की उन बस्तियों का, मैं ख़ुद भटका हुआ हूँ, उसकी वीराना गलियों में..... मुझ से क्या पूछते हो, पता इश्क़ की उन बस्तियों का, मैं ख़ुद भटका हुआ हूँ, उसकी...
थी मेरी भी एक दुनिया जिसमें, एक दोस्त से रंगत थी...! थी मेरी भी एक दुनिया जिसमें, एक दोस्त से रंगत थी...!
बड़ी भाती थी मुझे माँ और बच्चों की गतिविधियां जैसे मेरी जुड़ चुकी थी उनसे रिश्तेदारियां बड़ी भाती थी मुझे माँ और बच्चों की गतिविधियां जैसे मेरी जुड़ चुकी थी उनसे रिश्त...