ख़ाक .
Tragedy
पहले जो खुली आँखों से देखते थे सपने
अब आँखे मूंदने पर भी नहीं आते
इस मुकाम पर आ पहुंचे हैं हम कि
अब लोग हाल तक पूछने नहीं आते।
अब वक्त कहा ह...
उड़ना भूल गया...
कश्ती
हंस कर मिल ले...
हालात
थका तो नहीं ह...
ऐसे जीना भी क...
हर्फ़-दर-हर्फ़
नबी बने बैठे ...
रास्ते
भूल चुका है वो पंछी अपनी पहचान, जाने कब भरी थी उसने ऊंँची उड़ान। भूल चुका है वो पंछी अपनी पहचान, जाने कब भरी थी उसने ऊंँची उड़ान।
मेरे जज्बातों को पैरों तले कुचल जब तुम मुस्कराये। मेरे जज्बातों को पैरों तले कुचल जब तुम मुस्कराये।
समस्या से बड़ी समाधान नही होती ये कहना कितना आसान है. समस्या से बड़ी समाधान नही होती ये कहना कितना आसान है.
रिवायत इश्क़ की तुम तो भूल गए हम तो तुम्हारे थे तुम हमें छोड़ गए. रिवायत इश्क़ की तुम तो भूल गए हम तो तुम्हारे थे तुम हमें छोड़ गए.
पिंजरे में कैद पंछी परतंत्र की बेड़ियाँ पहने रहता है. पिंजरे में कैद पंछी परतंत्र की बेड़ियाँ पहने रहता है.
खड़ा हूँ आज भी वहीं उन्हीं राहों पे तेरे इंतजार में, खड़ा हूँ आज भी वहीं उन्हीं राहों पे तेरे इंतजार में,
खेल रहे वो खून की होली हम रंगों से खेलें कैसे। खेल रहे वो खून की होली हम रंगों से खेलें कैसे।
सबकी चुनौतियां तुमने स्वीकार कीं तुमने ज़िंदगी अपनी शर्तों पर जी सबकी चुनौतियां तुमने स्वीकार कीं तुमने ज़िंदगी अपनी शर्तों पर जी
दूर दराज पुराना घर, मैले आँगन पर कंकर-पत्थर। दूर दराज पुराना घर, मैले आँगन पर कंकर-पत्थर।
भारतीय चुनाव जनतांत्रिक चुनाव नहीं है , वो आम जनता के भावनाओं के साथ खिलवाड है. भारतीय चुनाव जनतांत्रिक चुनाव नहीं है , वो आम जनता के भावनाओं के साथ खिलवाड ...
बधाई हो एक और गणतंत्र दिवस निकल गया। बधाई हो एक और गणतंत्र दिवस निकल गया।
जिनके पास ओढ़ने को नीलांबर और बिछाने को धरा के सिवा कुछ भी तो नहीं है। जिनके पास ओढ़ने को नीलांबर और बिछाने को धरा के सिवा कुछ भी तो नहीं है।
चुनाव का मौसम आते गरीब के हित का, मचता है बड़े ही जोर का शोर। चुनाव का मौसम आते गरीब के हित का, मचता है बड़े ही जोर का शोर।
राम नाम का चादर ओढ़े खुद का दाग छिपाते हैं। राम नाम का चादर ओढ़े खुद का दाग छिपाते हैं।
दुनिया है बँटी हुई दो धड़े हैं बन गए युद्ध भूमि में वहाँ ना जाने कितने मर रहे । दुनिया है बँटी हुई दो धड़े हैं बन गए युद्ध भूमि में वहाँ ना जाने कित...
न तुम घर में होली मनाते, ना दीवाली, हम मनाते खुशियां, तुम करते रखवाली। न तुम घर में होली मनाते, ना दीवाली, हम मनाते खुशियां, तुम करते रखवाली।
वीर शहीदों की कुर्बानी , यही फरवरी चौदह थी, भींग गयी थी धरा अश्क से कैसे भूलूॅं। वीर शहीदों की कुर्बानी , यही फरवरी चौदह थी, भींग गयी थी धरा अश्क से कैसे भूलू...
आ गया आजकल कैसा,डरावना युग व्यक्ति ही व्यक्ति पर चला रहा चाबुक। आ गया आजकल कैसा,डरावना युग व्यक्ति ही व्यक्ति पर चला रहा चाबुक।
बड़ी ज़ोर की हवा चली है आज, रास्तों पर इतनी तेज़ हवा में चलना। बड़ी ज़ोर की हवा चली है आज, रास्तों पर इतनी तेज़ हवा में चलना।
विनाश के लिए बढ़ो अमित्र से नहीं डरो समूल शत्रु नाश हो तभी सुशस्त्र को धरो। विनाश के लिए बढ़ो अमित्र से नहीं डरो समूल शत्रु नाश हो तभी सुशस्त्र को धरो।