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ख़ाक .

Tragedy

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ख़ाक .

Tragedy

तनहा

तनहा

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पहले जो खुली आँखों से देखते थे सपने 

अब आँखे मूंदने पर भी नहीं आते

इस मुकाम पर आ पहुंचे हैं हम कि

अब लोग हाल तक पूछने नहीं आते।


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