STORYMIRROR

Radha Shrotriya

Romance

2  

Radha Shrotriya

Romance

तिश्नगी

तिश्नगी

1 min
108

प्रेम

तिश्नगी है,जो बुझती नहीं कभी

आँखो में अश्कों का समुन्दर है प्रेम!

डूबते ही जाना है 

खुद को खोना है हर बार,

और पार उतर जाना है!

"रूह के सागर से छलकी अमृत की बूँद है प्रेम"



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance