STORYMIRROR

Shweta Mishra

Abstract

4  

Shweta Mishra

Abstract

थोड़ा और मर्द बन जाते हैं

थोड़ा और मर्द बन जाते हैं

1 min
472

औरतों पर हाथ उठाकर,

कुछ मर्द थोड़ा और मर्द बन जाते हैं,

किस जगह जाना है, क्या पहनना है,


कितना बोलना है, कितना हंसना है,

और कितना मेकअप लगाना है,

इन सभी क्रियाओं को बाध्य करके,

कुछ मर्द थोड़ा और मर्द बन जाते है,


बच्चियों को राह चलती महिलाओं को

अनचाहे एक्सप्रेशन देकर,

कभी जीजा, देवर तो कभी बहनोई का पद लेकर


औरतों से अश्लीलता करते हुए

कुछ मर्द थोड़ा और मर्द बन जाते हैं...!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract