STORYMIRROR

DARSHITA SHAH

Abstract

3  

DARSHITA SHAH

Abstract

नशा

नशा

1 min
283

गांव में मिलता नहींं

नाम में मिलता नहींं

प्यार जैसा नशा तो

जाम मे मिलता नहींं


कृष्ण जैसा सारथी

राम मे मिलता नहींं

सुदामा जैसा दोस्त

ढूढने से मिलता नहींं


जो यकी नो, हो कही

भी खुदा मिलता नहीं

दिल के दर्दो का इलाज   

बाम में मिलता नहीं


मोक्ष की अनुभूति यहां  

काम में मिलता नहीं

प्यार का दरिया कही 

दाम में मिलता नहीं 


कृष्ण जैसा सारथी  

राम में मिलता नहींं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract