STORYMIRROR

DARSHITA SHAH

Others

2  

DARSHITA SHAH

Others

मौसम

मौसम

1 min
113

आज मौसम एक बड़ा सैलाब लेके आया है।

हर तरफ अंधेरा ही अंधेरा देखो छाया है॥


जीस्त पे भारी पड़ा है एक ही पल का ये कहर।

साथ अपने आंधी में दुनिया बहा के लाया है॥


पल दो पल में ओझल हुई शहरों की रौनक कहां।

सोचते हैं हम क्या खोया है हमने, क्या पाया है॥


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from DARSHITA SHAH

रात

रात

1 min पढ़ें

नशा

नशा

1 min पढ़ें

मौसम

मौसम

1 min पढ़ें

माँ

माँ

1 min पढ़ें