STORYMIRROR

Surendra kumar singh

Inspirational

4  

Surendra kumar singh

Inspirational

थी,तो आयी

थी,तो आयी

1 min
211


एक बोझिल, जटिल,

और भ्रामक परिवेश के

अंतहीन सिलसिले से

ऊबकर,

खुशी की कल्पना कर ली।

हर पल खुश रहने लगा

धीरे धीरे वो दुश्वारियों भरा

अंतहीन सिलसिला

खुशी में घुलने लगा

और अब तो

खुशी है शेष है

चारो तरफ खुशी बिखरी हुई है

कल्पना में खुशी से धड़कता हुआ दिल

खुशी से धड़कता है

और अगर मैं कभी कोई

प्रार्थना करता हूँ

प्रार्थना में कुछ मांगता हूँ

तो इतना ही कि

प्रभु मुझे खुशी को

समेटने की शक्ति

देते रहना।

सचमुच खुशी तब भी थी

जब हालात मुश्किल से थे

और कल्पना की डोर पकड़कर

अब वास्तविकता में

तब्दील हो गयी है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational