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Pinki Khandelwal

Romance

4  

Pinki Khandelwal

Romance

तेरी यादों की बारिश मैं...।

तेरी यादों की बारिश मैं...।

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हर सुबह मन में उम्मीद होती तुझसे मिलने की,

तुझे यूं देखने की...

पर न तेरे आने की आहट मिलती,

न सांझ होते कोई उम्मीद बचती,


बस यादों मैं तेरी जी रहा हूं मैं,

न जाने कब से...,


आज भी संभाले खुद को रहता हूं,

क्योंकि तुझे मेरे बिखरे बालों से,

मेरी आदतों से शिकायत थी,

सोचता हूं हर पल जब कभी तू आएगी,

मुझको संभले देखेगी बाहों को अपने फैलाकर,

मुझमे ही खो जाएगी,


बस उन ख्बावो में तेरे जी रहा हूं,

न जाने कब से...,


तुझे मेरे गुस्से से शिकायत थी,

देख अब मुस्कुराता रहता हूं,

तुझे देखने की तड़प में दिन रात बेचैन रहता हूं,

आंखों के अश्रु हर पल बहते रहते,

न जाने कौनसी बारिश में भीगे रहते,


बस तुझे देखने की चाहत में जी रहा हूं,

न जाने कब से...,


लोग कहते भूल जा उसको,

वो कभी तेरी नही होगी,

मैंने कहा भूल जाऊं भला उसे,

जिसके लिए दिल धड़कता है,

भूल जाऊं उसे जिसके आने की उम्मीद में जिंदा हूं,

भूल जाऊं उसे जिसके बारे में सोच कर मुस्कुराता हूं,

भूल जाऊं उसे जिसके लिए खुद को संभाले हुए हूं,


यह भला कैसे संभव है वो है मेरी हर सांसों में,

वो है मेरे हर रोम रोम में,

बेशक आपको न दिखे,

पर वो मेरे दिल के कोने में आज भी जिंदा है।



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